Shri Vishnu Chalisa in Hindi PDF Download + श्री विष्णु चालीसा pdf

श्री विष्णु चालीसा (Shri Vishnu Chalisa in Hindi PDF) उन व्यक्तियों द्वारा पढ़ा जाता है जो भगवान विष्णु का आशीर्वाद और लाभ चाहते हैं। विष्णु चालीसा भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रसिद्ध हिंदू भजन है। विष्णु चालीसा का पाठ करके लोग अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करने की कामना करते हैं।

Shri Vishnu Chalisa PDF Download

Shri Vishnu Chalisa in Hindi PDF

श्री विष्णु चालीसा का पाठ करके व्यक्ति भगवान विष्णु के लाभों का आह्वान करता है और उनकी कृपा से अशुभ परिणामों से सुरक्षा चाहता है। यह चालीसा भगवान विष्णु की महिमा का अद्वितीय वर्णन है और भक्त निस्वार्थ भाव से इसका पाठ करते हैं।

श्री विष्णु चालीसा का पाठ अक्सर विभिन्न संतों द्वारा और मंदिरों में भी किया जाता है। यह चालीसा भगवान विष्णु की पूजा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है और लोग इसे विष्णु जयंती और एकादशी सहित विशेष अवसरों पर भी पढ़ते हैं।

इस भजन को गाने से भक्तों को अपने जीवन में अच्छे बदलाव का अनुभव होता है और भगवान विष्णु की कृपा से धन, फिटनेस और समृद्धि प्राप्त होती है। विष्णु चालीसा का पाठ करने से भक्तों को संकटों से मुक्ति मिलती है और सुख-शांति का अनुभव होता है।

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PDF Name: Shri Vishnu Chalisa in Hindi PDF
No. of Pages: 5
PDF Size: 260 KB
PDF Category: Religion & Spirituality
Source / Credits: https://notespdfdownload.com/
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हिंदू भक्ति भजनों के विशाल सागर में, विष्णु चालीसा ब्रह्मांड के संरक्षक, भगवान विष्णु को समर्पित धार्मिक श्रद्धा के एक कालातीत प्रतीक के रूप में खड़ा है। भक्ति और प्रतिफल के छंदों से युक्त, विष्णु चालीसा दिव्य आशीर्वाद, सुरक्षा और आध्यात्मिक उत्थान की तलाश करने वाले भक्तों के लिए गहरा महत्व रखता है।

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भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव के साथ त्रिमूर्ति के महत्वपूर्ण देवताओं में से एक के रूप में एक प्रासंगिक भूमिका निभाते हैं। ब्रह्मांड के संरक्षक और पालनकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित, विष्णु ब्रह्मांडीय व्यवस्था को बहाल करने और धार्मिकता को बनाए रखने के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं।

श्री विष्णु चालीसा भगवान विष्णु के गुणों और दिव्य गुणों का गुणगान करता है। मधुर छंदों कल्पना के माध्यम से, भक्त भगवान की उदारता और सुंदरता की तलाश में अपनी हार्दिक श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

|| दोहा ||

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

॥ श्री विष्णु चालीसा ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।

तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।

करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।

भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।

देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।

शंकर का तुम फंद छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।

मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।

हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।

गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥

चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।

जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।

करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥

करहुं प्रणाम कौन विधि सुमिरन, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।

सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जानि लेव अपनाई ।

पाप दोष संताप नशाओ, भवबन्धन से मुक्त कराओ ॥

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।

निगम सदा ये विनय सुनावौ, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥

FAQ..

विष्णु चालीसा क्या है?

विष्णु चालीसा हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक, भगवान विष्णु को समर्पित एक भक्ति भजन है।

विष्णु चालीसा की रचना किसने की?

विष्णु चालीसा का श्रेय पारंपरिक रूप से ऋषि तुलसीदास को दिया जाता है, जो हिंदू धर्म में एक श्रद्धेय कवि-संत थे। तुलसीदास को प्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस की रचना के लिए भी जाना जाता है।

विष्णु चालीसा का पाठ करने का क्या महत्व है?

विष्णु चालीसा का पाठ करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है।

विष्णु चालीसा का पाठ करने में कितना समय लगता है?

विष्णु चालीसा का पाठ करने में लगने वाला समय पाठ करने वाले की गति के आधार पर भिन्न हो सकता है। पाठ पूरा करने में औसतन 15 से 20 मिनट का समय लगता है।

क्या विष्णु चालीसा का पाठ किसी विशेष दिन या समय पर किया जा सकता है?

विष्णु चालीसा का पाठ कब किया जा सकता है, इस पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं है। कई भक्त गुरुवार को या भगवान विष्णु को समर्पित शुभ अवसरों के दौरान इसका पाठ करना पसंद करते हैं।

क्या विष्णु चालीसा का पाठ करने के कोई विशेष लाभ हैं?

विष्णु चालीसा का नियमित पाठ शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण ला सकता है। ऐसा माना जाता है कि यह बाधाओं को दूर करता है और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है।

क्या विष्णु चालीसा का पाठ करने का कोई विशेष तरीका है?

विष्णु चालीसा का पाठ कैसे किया जाए इस पर कोई सख्त नियम नहीं है, यह अक्सर भक्ति और ईमानदारी के साथ किया जाता है। कुछ लोग इसे चुपचाप जपना पसंद कर सकते हैं, जबकि अन्य इसे ज़ोर से जपना पसंद करते हैं। मुख्य बात यह है कि इसका पाठ शुद्ध हृदय और एकाग्र मन से किया जाए।

क्या गैर-हिन्दू विष्णु चालीसा का पाठ कर सकते हैं?

विष्णु चालीसा का पाठ किसी भी धर्म का व्यक्ति कर सकता है। भगवान विष्णु के सार्वभौमिक गुणों का जश्न मनाते हैं, और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को इसकी शिक्षाओं में प्रेरणा मिल सकती है।

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